INDIAMIXINDIAMIXINDIAMIX
  • देश
  • मध्यप्रदेश
    • रतलाम
    • देवास
    • उज्जैन
    • सीहोर
    • इंदौर
    • भोपाल
    • झाबुआ
    • धार
    • सतना
    • रीवा
  • राज्य
    • गुजरात
      • दाहोद
    • उत्तरप्रदेश
      • लखनऊ
    • राजस्थान
      • जयपुर
      • उदयपुर
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
    • YouTube
    • Story Archives
    • टेक्नोलॉजी
    • विडियो
    • सेहत/घरेलु नुस्खे
    • धर्म/ज्योतिष
    • कला/साहित्य
    • खेल
Search
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-8959521010
Reading: राजनीति: नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामा
Share
Notification
Font ResizerAa
INDIAMIXINDIAMIX
Font ResizerAa
  • देश
  • मध्यप्रदेश
  • राज्य
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
Search
  • देश
  • मध्यप्रदेश
    • रतलाम
    • देवास
    • उज्जैन
    • सीहोर
    • इंदौर
    • भोपाल
    • झाबुआ
    • धार
    • सतना
    • रीवा
  • राज्य
    • गुजरात
    • उत्तरप्रदेश
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
    • YouTube
    • Story Archives
    • टेक्नोलॉजी
    • विडियो
    • सेहत/घरेलु नुस्खे
    • धर्म/ज्योतिष
    • कला/साहित्य
    • खेल
Follow US
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-8959521010
INDIAMIX > राजनीति > राजनीति: नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामा
राजनीति

राजनीति: नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामा

कभी-कभी किसी गंभीर मुद्दे पर राजनैतिक दलों की चुप्पी इतनी गहरी होती है कि वह अपने आप में एक बयान बन जाती है।

SANJAY SAXENA
Last updated: 09/07/2025 7:59 PM
By
SANJAY SAXENA
Share
11 Min Read
SHARE
Silence of leaders for political gains and drama of uproar

न्यूज़ डेस्क/इंडियामिक्स भारत की राजनीति एक ऐसा मंच है, जहां हर दिन नया ड्रामा, नया विवाद और नई कहानियां जन्म लेती हैं। यह वह रंगमंच है, जहां राजनैतिक दल और उनके नेता कभी किसी मुद्दे पर गहरी चुप्पी साध लेते हैं, तो कभी मामूली-सी बात को लेकर हंगामा खड़ा कर देते हैं। यह चुप्पी और हंगामा, दोनों ही उनकी सियासत का हिस्सा हैं। एक सोची-समझी रणनीति, जो जनता के मन को भटकाने, सहानुभूति बटोरने या विरोधियों को घेरने के लिए रची जाती है। इस सियासत की परतें इतनी जटिल हैं कि आम आदमी अक्सर यह समझ ही नहीं पाता कि आखिर माजरा क्या है। ताजा मामला महाराष्ट्र में भाषा विवाद से जुड़ा हुआ है जहां मराठी की अस्मिता के नाम पर उत्तर भारतीयों को मारा-पीटा जा रहा है और इस पर उत्तर भारत में राजनीति करने वाले नेता तक मुंह खोलने से कतरा रहे हैं। कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष खरगे सब के मुंह पर ताला लगा हुआ है। यहां तक कि कांग्रेस को जिताने के लिये चुनावी दौरे पर बिहार गए राहुल गांधी इस मसले पर चुप्पी साधे रहे, यही हाल सपा प्रमुख अखिलेश यादव का भी है जिन्होंने गत दिनों एक कथावाचक के साथ अभद्रता के मामले को ब्राह्मण-यादव के बीच की लड़ाई बना दिया था। इसी तरह से यूपी के बलरामपुर में एक मौलाना के धर्मांतरण के घिनौने खेल, जिसमें हिन्दू युवतियों को लव जिहाद में फंसाया जा रहा था के बारे में अखिलेश सहित तमाम गैर बीजेपी दलों की चुप्पी घातक लगती है।

कभी-कभी किसी गंभीर मुद्दे पर राजनैतिक दलों की चुप्पी इतनी गहरी होती है कि वह अपने आप में एक बयान बन जाती है। उदाहरण के लिए, जब देश में कोई बड़ा घोटाला सामने आता है, या कोई सामाजिक मुद्दा जैसे जातिगत हिंसा, धार्मिक तनाव या आर्थिक असमानता उभरता है, तो कुछ दल और उनके नेता ऐसी खामोशी ओढ़ लेते हैं, मानो उन्हें कुछ पता ही न हो। यह चुप्पी कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति होती है। वे जानते हैं कि कुछ मुद्दों पर बोलना उनके वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकता है। मिसाल के तौर पर, जब किसी संवेदनशील धार्मिक मुद्दे पर देश में तनाव बढ़ता है, तो कई नेता चुप रहना पसंद करते हैं, क्योंकि उनकी एक टिप्पणी उनके समर्थकों को नाराज कर सकती है या विरोधियों को हमला करने का मौका दे सकती है। यह चुप्पी उनकी सियासत का एक हिस्सा है, जो न बोलकर भी बहुत कुछ कह जाती है।

वहीं, दूसरी ओर, कुछ मुद्दों पर राजनैतिक दल और नेता इतना हंगामा खड़ा कर देते हैं कि वह मुद्दा असल में जितना बड़ा है, उससे कहीं ज्यादा विशाल दिखने लगता है। छोटी-सी घटना को तूल देना, सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाना, और सड़कों पर प्रदर्शन करना यह सब उनकी रणनीति का हिस्सा होता है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश की सियासत में 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान देखा गया कि कैसे कुछ दलों ने छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर बड़े-बड़े प्रदर्शन किए। एक नेता के बयान को तोड़-मरोड़कर उसे जातिगत या धार्मिक रंग दे दिया गया, और फिर उस पर हफ्तों तक बहस चली। यह हंगामा इसलिए नहीं था कि मुद्दा वाकई इतना गंभीर था, बल्कि इसलिए कि वह दल उस समय जनता का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहता था।

इस चुप्पी और हंगामे की सियासत के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है वोट बैंक की राजनीति। भारत जैसे देश में, जहां जाति, धर्म, और क्षेत्रीयता राजनीति के केंद्र में हैं, राजनैतिक दल हर कदम सोच-समझकर उठाते हैं। अगर कोई मुद्दा उनके कोर वोटरों को नाराज कर सकता है, तो वे उस पर चुप्पी साध लेते हैं। मिसाल के तौर पर, जब किसी राज्य में जातिगत हिंसा की घटना होती है, तो कुछ दल इस पर बोलने से बचते हैं, क्योंकि उनका वोट बैंक उस जाति से जुड़ा हो सकता है। वहीं, अगर कोई मुद्दा उनके विरोधियों को घेरने का मौका देता है, तो वे उस पर इतना शोर मचाते हैं कि जनता का ध्यान मूल मुद्दे से हटकर उनकी सियासत पर चला जाता है।

2024 में उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसा ही कुछ देखने को मिला। लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को कुछ सीटों पर अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। इसके पीछे कई कारण थे, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे सरकार की विफलता के रूप में प्रचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ (पीडीए) के नारे को इतना जोर-शोर से उठाया कि यह जनता के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया। दूसरी ओर, जब राम मंदिर जैसे मुद्दे पर विपक्ष को बोलने का मौका मिला, तो कई नेता चुप्पी साध गए, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनके बयान से हिंदू वोटर नाराज हो जाएं। यह चुप्पी और हंगामे का खेल सियासत का एक पुराना हथियार है, जो आज भी उतना ही प्रभावी है।

इस सियासत का एक और पहलू है मीडिया और सोशल मीडिया का बेजा इस्तेमाल। आज के दौर में, जहां हर व्यक्ति के हाथ में स्मार्टफोन है, राजनैतिक दल और नेता सोशल मीडिया को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। किसी मुद्दे पर हंगामा खड़ा करना हो, तो एक्स पर ट्रेंड चलाया जाता है, व्हाट्सएप ग्रुप्स में मैसेज वायरल किए जाते हैं, और टीवी चैनलों पर घंटों बहस कराई जाती है। उदाहरण के लिए, जब किसी नेता का कोई पुराना वीडियो या बयान वायरल होता है, तो विपक्षी दल उसे लेकर इतना हंगामा मचाते हैं कि वह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है। लेकिन जब बात उनके अपने नेताओं के विवादास्पद बयानों पर आती है, तो वही दल चुप्पी साध लेते हैं। यह दोहरा रवैया जनता को भ्रमित करता है, लेकिन सियासत के लिए यह एक आजमाया हुआ नुस्खा है।

राजनैतिक दलों की यह रणनीति केवल जनता को प्रभावित करने तक सीमित नहीं रहती। यह उनके आंतरिक संगठन और नेतृत्व पर भी असर डालती है। कई बार, किसी बड़े मुद्दे पर चुप्पी इसलिए साधी जाती है, क्योंकि दल के अंदर ही उस मुद्दे पर मतभेद होते हैं। उदाहरण के लिए, जब किसी दल में नए नेतृत्व को लेकर चर्चा होती है, तो कई वरिष्ठ नेता चुप रहते हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनकी टिप्पणी से उनके करियर को नुकसान पहुंचे। वहीं, जब कोई छोटा-मोटा मुद्दा उछलता है, तो वही नेता सबसे आगे आकर बयानबाजी शुरू कर देते हैं, ताकि मीडिया में उनकी तस्वीर छपे और कार्यकर्ताओं में उनका रुतबा बढ़े।

इस चुप्पी और हंगामे की सियासत का एक और उदाहरण है मायावती जैसे नेताओं का रवैया। 2024 में जब पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, तो मायावती ने सभी दलों को एकजुट होने की सलाह दी, लेकिन साथ ही उन्होंने कुछ नेताओं की ‘घिनौनी राजनीति’ की आलोचना भी की। यह एक तरह से हंगामा खड़ा करने की कोशिश थी, ताकि वह अपने समर्थकों के बीच प्रासंगिक बनी रहें। लेकिन जब बात उनके भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में वापसी की आई, तो उन्होंने सशर्त चुप्पी साध ली, ताकि कोई विवाद न खड़ा हो। यह दिखाता है कि कैसे नेता अपने हितों के हिसाब से चुप्पी और हंगामे का इस्तेमाल करते हैं।

यह सियासत केवल राष्ट्रीय या राज्य स्तर तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर भी यही खेल चलता है। नगर निगम के चुनावों में, छोटे-छोटे मुद्दों जैसे सड़क की मरम्मत या पानी की सप्लाई को लेकर इतना हंगामा मचाया जाता है कि वह एक राष्ट्रीय मुद्दे जैसा दिखने लगता है। लेकिन जब बात बड़े नीतिगत फैसलों की आती है, जैसे शिक्षा या स्वास्थ्य सुधार, तो वही नेता चुप्पी साध लेते हैं, क्योंकि इन मुद्दों पर बोलने से तात्कालिक सियासी फायदा नहीं मिलता।

इस चुप्पी और हंगामे की सियासत का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाता है। बेरोजगारी, महंगाई, और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दे पीछे छूट जाते हैं, जबकि छोटे-मोटे विवाद सुर्खियां बटोरते हैं। जनता को लगता है कि उनके नेता उनके लिए लड़ रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह सियासत केवल सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का एक जरिया है।

आज के दौर में, जब सूचना का प्रवाह इतना तेज है, राजनैतिक दलों और नेताओं को अपनी इस रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। जनता अब पहले से ज्यादा जागरूक है। सोशल मीडिया पर हर मुद्दे पर बहस होती है, और लोग नेताओं की चुप्पी और हंगामे को समझने लगे हैं। अगर दल और नेता इस सियासत को छोड़कर वास्तविक मुद्दों पर ध्यान दें, तो शायद भारत की राजनीति का चेहरा बदल सकता है।  

डिस्क्लेमर

 खबर से सम्बंधित समस्त जानकारी और साक्ष्य ऑथर/पत्रकार/संवाददाता की जिम्मेदारी हैं. खबर से इंडियामिक्स मीडिया नेटवर्क सहमत हो ये जरुरी नही है. आपत्ति या सुझाव के लिए ईमेल करे : editor@indiamix.in

Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Threads
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Cry0
Surprise0
Angry0
Embarrass0
BySANJAY SAXENA
Follow:
वरिष्ठ पत्रकार, इंडियामिक्स, उत्तर प्रदेश
Previous Article राजनीति: उत्तरप्रदेश में हिन्दुत्व या पीडीए कौन पड़ रहा है भारी राजनीति: उत्तरप्रदेश में हिन्दुत्व या पीडीए कौन पड़ रहा है भारी
Next Article विश्लेषण: कट्टरपंथ के खिलाफ पढ़े-लिखे मुसलमानों की खामोशी के मायने विश्लेषण: कट्टरपंथ के खिलाफ पढ़े-लिखे मुसलमानों की खामोशी के मायने
Leave a review Leave a review

Leave a Review Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please select a rating!

प्रशासनिक अधिकारियो से, नेताओ से और पुलिस से आपका निजी लगाव आपकी पत्रकारिता को निष्पक्ष नहीं रहने देता

मुकेश धभाई, संपादक, इंडियामिक्स

Stay Connected

FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
WhatsAppFollow
Google NewsFollow
ThreadsFollow
RSS FeedFollow

Latest News

राजनीति: बिहार में शून्य के पहाड़ पर समाजवादी पार्टी
राजनीति: बिहार में शून्य के पहाड़ पर समाजवादी पार्टी
राजनीति
30/08/2025
AI के दुरुपयोग से तेज बने Cyber Criminal, सुरक्षा तंत्र को रक्षात्मक नहीं आक्रमक होना पड़ेगा!
AI के दुरुपयोग से तेज बने Cyber Criminal, सुरक्षा तंत्र को रक्षात्मक नहीं आक्रमक होना पड़ेगा!
टेक्नोलॉजी
30/08/2025
राजनीति: योगी के पास संभल हिंसा-डेमोग्राफी चेंज की रिपोर्ट आते ही सियासत शुरू
राजनीति: योगी के पास संभल हिंसा-डेमोग्राफी चेंज की रिपोर्ट आते ही सियासत शुरू
उत्तरप्रदेश
28/08/2025
राजनीति: लखनऊ में आयेगा राजनाथ के बाद बेटे नीरज का दौर !
राजनीति: लखनऊ में आयेगा राजनाथ के बाद बेटे नीरज का दौर !
राजनीति
28/08/2025
राजनीति: माया राजनीति से मोह भंग की शिकार नहीं, बस सही समय का इंतजार !
राजनीति: माया राजनीति से मोह भंग की शिकार नहीं, बस सही समय का इंतजार !
राजनीति
27/08/2025

पत्रकारिता आपकी जान ले सकती हैं, लेकिन जब तक आप इसमें हैं, तब तक ये आपको जीवित रखेगी.

होरेस ग्रीले
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
INDIAMIXINDIAMIX
Follow US
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-8959521010
adbanner