INDIAMIXINDIAMIXINDIAMIX
  • देश
  • मध्यप्रदेश
    • रतलाम
    • देवास
    • उज्जैन
    • सीहोर
    • इंदौर
    • भोपाल
    • झाबुआ
    • धार
    • सतना
    • रीवा
  • राज्य
    • गुजरात
      • दाहोद
    • उत्तरप्रदेश
      • लखनऊ
    • राजस्थान
      • जयपुर
      • उदयपुर
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
    • YouTube
    • Story Archives
    • टेक्नोलॉजी
    • विडियो
    • सेहत/घरेलु नुस्खे
    • धर्म/ज्योतिष
    • कला/साहित्य
    • खेल
Search
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-8959521010
Reading: राहुल-अखिलेश पर टिकी 2029 की राजनीति
Share
Notification
Font ResizerAa
INDIAMIXINDIAMIX
Font ResizerAa
  • देश
  • मध्यप्रदेश
  • राज्य
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
Search
  • देश
  • मध्यप्रदेश
    • रतलाम
    • देवास
    • उज्जैन
    • सीहोर
    • इंदौर
    • भोपाल
    • झाबुआ
    • धार
    • सतना
    • रीवा
  • राज्य
    • गुजरात
    • उत्तरप्रदेश
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
    • YouTube
    • Story Archives
    • टेक्नोलॉजी
    • विडियो
    • सेहत/घरेलु नुस्खे
    • धर्म/ज्योतिष
    • कला/साहित्य
    • खेल
Follow US
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-9753910111
INDIAMIX > देश > राहुल-अखिलेश पर टिकी 2029 की राजनीति
देशराजनीति

राहुल-अखिलेश पर टिकी 2029 की राजनीति

Ajai Kumar
Last updated: 19/05/2026 6:30 PM
By
Ajai Kumar
Share
8 Min Read
SHARE
The Politics of 2029 Hinges on Rahul and Akhilesh

न्यूज़ डेस्क/इंडियामिक्स 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जब देश ने विपक्षी गोलबंदी का एक महा-प्रयोग देखा था, तब उसका नाम था ‘इंडिया गठबंधन’ । यह प्रयोग बिना संदेह बड़ा था। 26 प्रमुख विपक्षी दलों को एक छत के नीचे लाना कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी। लेकिन इसकी सबसे बड़ी त्रासदी यह रही कि इसे कभी कोई सर्वमान्य चेहरा या नेतृत्व नहीं मिल सका। ‘विपक्ष का दूल्हा कौन बनेगा?’ यह अंतहीन कलह गठबंधन की बुनियाद को ही खोखला करती रही। नीतीश कुमार को संयोजक बनाया जाए तो ममता बनर्जी वीटो लगा देती हैं, राहुल गांधी के नाम पर सहमति बनती ही नहीं। नतीजा यह निकला कि बिखरा हुआ विपक्ष अपने-अपने राज्यों के किलों में सिमटकर रह गया, जिन्हें बीजेपी एक-एक करके ढहा रही है। आज जैसे-जैसे विपक्षी धुरंधर बारी-बारी चुनावी बिसात पर धराशायी हो रहे हैं, राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस का ‘डिफॉल्ट’ दावा एक बार फिर पूरी ताकत से जिंदा हो गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का हालिया बयान इसी नैरेटिव की बानगी है। उन्होंने राहुल गांधी को 2029 का ‘प्राइम-चैलेंजर’ घोषित कर दिया है और कहा कि कांग्रेस सबसे पहले अपने सहयोगियों से इस बात पर सहमति बनाएगी। रेवंत की थ्योरी दिलचस्प है। वे लेफ्ट और क्षेत्रीय क्षत्रपों की हार में कांग्रेस की जीत देख रहे हैं। विडंबना यह है कि ये वही दल हैं जो कल तक ‘इंडिया गठबंधन’ में कांग्रेस के साझेदार थे और आज अपने-अपने राज्यों में बीजेपी के चक्रव्यूह में फंसकर दम तोड़ रहे हैं।

-- विज्ञापन --

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की हार इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है। लोकसभा में टीएमसी ने किला बचा लिया था, लेकिन विधानसभा चुनाव की चौखट पर आते ही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग के सामने उनकी सारी रणनीतियां धरी की धरी रह गईं। बीजेपी ने यहां 206 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी 100 से नीचे लुढ़क गई। ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट से 15 हजार से ज्यादा वोटों से हार गईं। हाशिए पर खड़ी कांग्रेस को भले वहां दो सीटें मिलीं, लेकिन उसे इस बात का सुकून है कि बंगाल में अब टीएमसी का एकाधिकार खत्म हो चुका है। दिल्ली और पंजाब से कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने वाले अरविंद केजरीवाल का सपना ‘तीसरा विकल्प’ बनने का था। फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 27 साल बाद सत्ता में वापसी करते हुए आम आदमी पार्टी को करारी शिकस्त दी। 70 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि आप 22 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस आज इस गणित पर खुश हो सकती है कि जो भी जमीन आप खोएगी, वह आखिरकार कांग्रेस की झोली में ही गिरेगी। नीतीश कुमार ने 2024 से पहले विपक्ष को एक धागे में पिरोने के लिए देशव्यापी दौरे किए थे, लेकिन केंद्रीय राजनीति में उनका नेतृत्व स्थापित होने से पहले ही सहयोगियों के अविश्वास ने उनकी जमीन खिसका दी। 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

-- विज्ञापन --

अब रह गई केवल एक दीवार  अखिलेश यादव। वे राहुल गांधी के लिए एक जटिल पहेली हैं। चुनौती इसलिए हैं क्योंकि वे देश के सबसे बड़े सियासी सूबे, उत्तर प्रदेश, के निर्विवाद नायक हैं। यह वही यूपी है जिसने 2024 में बीजेपी के रथ को रोककर उसे बहुमत से दूर कर दिया था। अखिलेश आज विपक्ष के इकलौते ऐसे नेता हैं जिनके पास कोर ‘मुस्लिम-यादव’ वोटबैंक की अचूक ताकत है, एक मजबूत संगठन है और वे सीधे योगी-मोदी की जोड़ी की आंखों में आंखें डालकर लड़ रहे हैं। 2024 में कांग्रेस को यूपी में जो भी संजीवनी मिली, उसका पूरा श्रेय अखिलेश के खाते में जाता है। इस कड़वे सच के बावजूद, राहुल गांधी के लिए राहत की बात यह है कि समाजवादी पार्टी ने उनके साथ कभी वह ‘अहंकार और तिरस्कार’ का रवैया नहीं अपनाया, जो ममता बनर्जी ने बंगाल में दिखाया। अखिलेश खुद यूपी की सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए वे दिल्ली की रेस के लिए कांग्रेस से फिलहाल कोई नया मोर्चा नहीं खोलना चाहते। असल परीक्षा 2027 में होगी। यदि अखिलेश 2027 में यूपी फतह कर लेते हैं, तो वे राष्ट्रीय क्षितिज पर राहुल गांधी से कहीं बड़े कद के नेता बनकर उभरेंगे। वे 2027 की तैयारी कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि यूपी में अगले वर्ष समाजवादी सरकार बनने जा रही है। लेकिन यदि वे नाकाम रहे, तो राहुल गांधी 2029 के लिए ‘निर्विरोध चैलेंजर’ बन जाएंगे।

-- विज्ञापन --

क्षेत्रीय दलों की त्रासदी यह है कि उनकी प्रासंगिकता सिर्फ उनके राज्य की सत्ता से है, जबकि कांग्रेस के लिए ‘ब्रांड राहुल’ राज्यों की हार-जीत के नफे-नुकसान से बहुत ऊपर है। 2024 में 99 सीटें जीतकर कांग्रेस ने ऐसा जश्न मनाया था, मानो देश की सबसे पुरानी पार्टी अपने पुराने वैभव में लौट आई हो। लेकिन यह भ्रम जल्द ही टूट गया। हरियाणा में जीत का हलवा तैयार था, पर कांग्रेस की आपसी गुटबाजी और बीजेपी की माइक्रो-प्लानिंग ने बाजी पलट दी। इसके बाद पराजय का एक अंतहीन सिलसिला शुरू हो गया। महाराष्ट्र और बिहार में कांग्रेस सबसे निचले पायदान पर खिसक गई। गनीमत बस इतनी रही कि उसके मजबूत सहयोगी राजद, उद्धव शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी भी खुद को बचा नहीं पाए। तमिलनाडु में जब डीएमके का जहाज डूबने लगा, तो चतुर कांग्रेस ने समय रहते पाला बदलकर पांच विधायकों के साथ सत्ता के नए जहाज पर छलांग लगा दी। हाल ही में डीएमके ने कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने की घोषणा की है और लोकसभा में अलग बैठने की मांग की है। डीएमके और कांग्रेस का 20 साल पुराना रिश्ता पूरी तरह खत्म हो गया। पूरी तस्वीर का सबसे दिलचस्प और विरोधाभासी पहलू यही है कि देशभर में स्थितियां कांग्रेस के अनुकूल हो रही हैं, लेकिन इस खेल में कांग्रेस का अपना कोई पराक्रम नहीं है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी क्षेत्रीय दलों और वामपंथ के जिस सफाए पर संतोष जता रहे हैं, वह जमीन कांग्रेस ने नहीं, बल्कि बीजेपी ने जीती है। बिहार में नीतीश, बंगाल में ममता, दिल्ली में केजरीवाल और अगर स्थितियां ऐसी ही रहीं, तो 2027 में उत्तर प्रदेश में अखिलेश  बीजेपी एक-एक करके राहुल के सभी आंतरिक प्रतिद्वंदियों को रास्ते से हटा रही है। लब्बोलुआब यह है कि यदि राहुल गांधी की उम्मीदें अपने संगठन की ताकत से ज्यादा बीजेपी की आक्रामक विस्तारवादी नीति पर टिकी हैं, तो यह बहुत खतरनाक है। राहुल गांधी की राह के कांटे खुद पीएम मोदी ही दूर कर रहे हैं। यानी राहुल गांधी को विपक्ष का इकलौता सुल्तान बनाने का सेहरा, अनजाने में ही सही, बीजेपी के सिर ही सजेगा। विपक्ष का भविष्य अब अखिलेश यादव और 2027 के यूपी चुनाव पर टिका है   यही राजनीति का चक्रव्यूह है।


Website Design By

KAMAKSHI WEB

CONTACT : +91-9753910111


 

डिस्क्लेमर

 खबर से सम्बंधित समस्त जानकारी और साक्ष्य ऑथर/पत्रकार/संवाददाता की जिम्मेदारी हैं. खबर से इंडियामिक्स मीडिया नेटवर्क सहमत हो ये जरुरी नही है. आपत्ति या सुझाव के लिए ईमेल करे : editor@indiamix.in

इंडियामिक्स को सब्सक्राइब करे

Get it on Indus Appstore
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Threads
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Cry0
Surprise0
Angry0
Embarrass0
ByAjai Kumar
Follow:
वरिष्ठ पत्रकार , इंडियामिक्स, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Previous Article भीम आर्मी का अल्टीमेटम: “7 दिन में कार्रवाई नहीं तो होगा जिला मुख्यालय का घेराव” भीम आर्मी का अल्टीमेटम: “7 दिन में कार्रवाई नहीं तो होगा जिला मुख्यालय का घेराव”
Next Article एनकाउंटर- मुठभेड़ों से बदलती यूपी की राजनीति एनकाउंटर- मुठभेड़ों से बदलती यूपी की राजनीति
Leave a review Leave a review

Leave a Review Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please select a rating!

प्रशासनिक अधिकारियो से, नेताओ से और पुलिस से आपका निजी लगाव आपकी पत्रकारिता को निष्पक्ष नहीं रहने देता

मुकेश धभाई, संपादक, इंडियामिक्स

Stay Connected

FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
WhatsAppFollow
Google NewsFollow
ThreadsFollow
RSS FeedFollow

Latest News

एनकाउंटर- मुठभेड़ों से बदलती यूपी की राजनीति
एनकाउंटर- मुठभेड़ों से बदलती यूपी की राजनीति
उत्तरप्रदेश राजनीति
19/05/2026
भीम आर्मी का अल्टीमेटम: “7 दिन में कार्रवाई नहीं तो होगा जिला मुख्यालय का घेराव”
भीम आर्मी का अल्टीमेटम: “7 दिन में कार्रवाई नहीं तो होगा जिला मुख्यालय का घेराव”
सीहोर
19/05/2026
लाहौर को फिर मिलने लगी हिंदू नाम वाली पहचान
लाहौर को फिर मिलने लगी हिंदू नाम वाली पहचान
दुनिया
19/05/2026
योगी का संदेशः सड़क नमाजघर नहीं, कानून सबसे बड़ा धर्म
योगी का संदेशः सड़क नमाजघर नहीं, कानून सबसे बड़ा धर्म
उत्तरप्रदेश
19/05/2026
दुनिया : नेशन फर्स्ट पर आगे बढ़ता नेपाल
दुनिया : नेशन फर्स्ट पर आगे बढ़ता नेपाल
दुनिया
16/05/2026

पत्रकारिता आपकी जान ले सकती हैं, लेकिन जब तक आप इसमें हैं, तब तक ये आपको जीवित रखेगी.

होरेस ग्रीले
//

IndiaMIX Media Network was established in November 2018 in Ratlam city of Madhya Pradesh. Keeping in view the current digital era, it was started as a digital media (news portal).

  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
INDIAMIXINDIAMIX
Follow US
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-8959521010