सतना : प्रशासन मौन ! कायवाही करेगा कौन ?

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नगर निगम सिर्फ खानापूर्ति के लिए जाना जाता है दुकानदारों से सांठगांठ करके मामले को शांत करा दिया जाता है दुकानों का अतिक्रमण हटाया नहीं जाता ।

सतना : प्रशासन मौन ! कायवाही करेगा कौन ?


सतना / इंडियामिक्स न्यूज़ जहां एक ओर विश्व कोरोनावायरस महामारी से लड़ रहा है वही एक और इसका‌ फायदा उठाकर सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय सतना के सामने वाले पक्की दुकानदारों ने किया नाले के ऊपर तक अतिक्रमण…अधिकारी मौन, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नगर निगम सिर्फ खानापूर्ति के लिए जाना जाता है दुकानदारों से सांठगांठ करके मामले को शांत करा दिया जाता है दुकानों का अतिक्रमण हटाया नहीं जाता। ऐसा माना जाता है इस में अतिक्रमण दस्ते के अधिकारी और उनकी टीम की दुकानदारों से सांठगांठ है। जिसमें नगर निगम को कोई रुचि नहीं है। अगर अस्पताल गेट के बाहर मेहनत से दो पैसा कमाने वाले अपना पेट पालने वाले और अपने परिवार को चलाने वाले सभी ठेले वालों को इस कदर परेशान किया जाता है जैसे वह कमाई मेहनत की कमाई नहीं चोरी कर रहे हो


सूत्रों के मुताबिक अतिक्रमण दस्ता के ड्राइवर संजय गौतम भी ठेले वालों से करते हैं पैसों की मांग ठेले वालों के मना करने पर देते हैं धमकी कहते हैं कि अतिक्रमण दस्ता गाड़ी लेकर आ रहा हूं देख लूंगा । ठेले वालों का कहना है पैसे ना देने पर करते हैं बहुत परेशान, यातायात व्यवस्था बदहाल, ट्राफिक पुलिस बेबस और लाचार सतना…शहर की ट्राफिक व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है, जिसे सुधारने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है। हर साल सड़क सुरक्षा सप्ताह के नाम पर ट्राफिक पुलिस लोगों को नियमों की जानकारी तो देती है, लेकिन सही समय और सही जगह पर उचित कार्रवाई न किए जाने से व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं आ रहा है। आज शहर का आलम ये है कि सिविल लाइन चौराहा, जयस्तंभ, रेलवे स्टेशन रोड, अस्पताल तिराहा, नजीराबाद रोड, सर्किट हाउस चौराहा, सेमरिया चौराहा में वाहनों की धमाचौकड़ी देखकर भी पुलिस द्वारा की जा रही अनदेखी बेकसूर राहगीरों पर भारी पड़ रही है। जिससे छुटपुट घटनाओं की वजह से कहीं किसी की बाइक क्षतिग्रस्त हो जाती है तो कहीं कोई पैदल राहगीर घायल हो जाता है। जिसे ठीक करने के लिए शहर में ट्राफिक सर्जिकल की दरकार है


जयस्तंभ में बुरे हाल


मार्केट एरिया की बात करें तो जयस्तंभ चौक से लेकर रेलवे स्टेशन तक ट्राफिक व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। यहां के हाल इतने बुरे हैं कि अगल-बगल से निकलने वाले वाहन एक दूसरे में उलझकर फंस जाते हैं। जिसकी वजह से यहां सुबह से लेकर रात तक जाम की स्थिति बनी रहती है। यहां की दुर्दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जयस्तंभ से रेलवे स्टेशन तक महज तीन सौ मीटर की सड़क पार करने में वाहन चालकों को कम से कम 10 से 15 मिनट लग जाते हैं। इसकी मुख्य वजह ये है कि पोस्ट आफिस के बाहर बीच रोड में कोई भी चार पहिया वाहन खड़ा करके चला जाता है। यहां पर दो दर्जन से अधिक फलों व चाट फुल्की के ठेला खड़े रहते हैं। स्टेशन रोड में दुकानों का सामान सड़क तक फैला रहता है। जिससे 15 फिट चौड़ी सड़क 5 फिट ही चलने लायक बचती है।


सर्किट हाउस में टूट रहे नियम


सर्किट हाउस चौराहे में ट्राफिक सिग्नल तो लगा हुआ है। लेकिन वाहन चालक बिना सिग्नल की परवाह किए हुए सड़क पार कर रहे हैं। यहां पर दिन-रात वाहनों का ऐसा झुंड लगा रहता है कि पलक झपकते ही कब, कहां, कौन, किससे टकरा जाए कोई भरोसा नहीं रहता है। जल्दी से जल्दी चौराहा पार करने की होड़ में अपनी मर्जी से जब चाहे तब सामने से आ रहे वाहन के आगे अपनी गाड़ी सटा देते हैं। कोई किसी को टक्कर मार देता है तो कोई किसी से गाली गलौज करते हुए आगे बढ़ जाता है। ये सब तमाश वहां तैनात ट्राफिक पुलिस देखती रहती है , लेकिन व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाती।


जान बची तो लाखों पाए


इन दिनों शहर के सबसे व्यस्ततम सेमरिया चौराहे में ट्राफिक की दुर्दशा इतनी बदहाल है कि यहां से गुजरने वाले राहगीर बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर रास्ता पार करते हैं। बिरला रोड में एक तो फ्लाई ओवर का निर्माण करने वाली कंपनी ने आधे से अधिक सड़क में कब्जा कर रखा है। ऊपर से सड़क पर ही फल-फूल, खिलौना, सब्जी, चाठ ठेला वाले पूरा बाजार खोलकर रखे हैं। इसके बाद आटो वाले जब जहां चाहे वहीं खड़ी करके सवारी बैठाएंगे तो कोई सवारी उतारेगा तो कोई ऑटो वाला गप्पें लड़ाएगा। लेकिन सड़क से किनारे नहीं हटेंगे। इसके बाद दिनरात बसों का आना-जाना यहीं से होता है। इन सबके बीच दो पहिया व पैदल चालक गिरते-पड़ते अपनी जान बचाते यहां से निकल पाते हैं। लेकिन ट्राफिक पुलिस कभी न तो ठेला वालों को खदेड़ती और न ही ऑटो वालों को हटाती है।


ट्राफिक बूथ पर लटका ताला

सिविल लाइन चौराहे से लगभग 250 मीटर दूर कोठी तिराहा स्थित ट्राफिक बूथ पर लटका ताला इस ओर इशारा करता है कि यातायात पुलिस व्यवस्था को सुधारने में कितनी गंभीर है। यदि बात की जाए तो इस बूथ पर अक्सर ताला ही लटकता रहता है। जिसकी वजह से कोठी तिराहे पर पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होने से व्यवस्था और भी बिगड़ रही है। ट्राफिक बूथ बंद होने की वजह से बस व ऑटो चालक इसके सामने वाहन खड़ा करके सवारी भरते दिखाई देते हैं।


कोठी तिराहे में बस चालकों का कब्जा

सिविल लाइन व कोठी तिराहा तो पूरी तरह से अघोषित बस स्टैंड बनकर रह गया है। नागौद, पन्ना , छतरपुर जाने वाली सभी बसें कोठी तिराहे में बीच सड़क पर आकर खड़ी होती हैं। एक के पीछे एक तीन बसें खड़ी होकर सवारी भरने लगती हैं जिससे जाम लग जाता है। वहीं चित्रकूट की ओर आने-जाने वाली बसें व चार पहिया वाहन आड़े-तिरछे खड़े हो जाते हैं। इस तरह दूसरे आम राहगीरों व बाइक चालकों को बड़ी मुश्किल से यहां से निकलना पड़ता है। ऐसा लगता है जैसे कोठी तिराहा मिनी बस स्टैंड बन गया है। जहां सिर्फ बस चालकों की मनमानी और बस मालिकों का राज चलता है। जिनके सामने ट्राफिक पुलिस पूरी तरह बेबस और लाचार नजर आती है। जिसके चलते बस चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

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