हाटपिपल्या विधानसभा उपचुनाव क्या भाजपा संगठन में सब कुछ ठीक चल रहा है..?

देवास इंडियामिक्स न्यूज़ मध्यप्रदेश की राजनीति में कुछ दिन पहले आए भूचाल मैं जिस प्रकार घटनाक्रम उभरकर सामने आए हैं उसमें 22 सिंधिया समर्थक विधायकों द्वारा अपने विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद श्री शिवराज सिंह जी चौहान पुनः मुख्यमंत्री पद पर विराजित हो गए हैं और कोरोना संकट से प्रदेश को उभारने के लिए दिन रात लगे हुए है। इसी कड़ी में हाटपिपल्या से सिंधिया समर्थक मनोज चौधरी द्वारा भी अपने विधायक पद से इस्तीफा दिया गया तथा कांग्रेस पार्टी छोड़कर वह भी भाजपा में शामिल हुए। अब इनको टिकट देना भाजपा की मजबूरी है।
गौरतलब हो कि 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में मनोज चौधरी ने मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री दीपक जोशी को चित करते हुए 13000 वोटों से विजय श्री प्राप्त की थी परंतु जब अब वापस उपचुनाव होने हैं और संगठन द्वारा भाजपा के कार्यकर्ताओं से चर्चा कर अवगत करा दिया गया है हर परिस्थिति में टिकट मनोज चौधरी को ही दी जावेगी ऐसे में भाजपा के कद्दावर पूर्व मंत्री दीपक कैलाश जोशी भी मीडिया में अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में हैं। जिस प्रकार कुछ दिनों पहले उन्होंने मीडिया चर्चा में “मेरे लिए सारे विकल्प खुले हैं” जैसा कथन कहा था। और उसके तुरंत बाद ही उन्हें भोपाल मुख्यालय तलब किया गया था। संगठन मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, एवं मुख्यमंत्री से मिलने के पश्चात उनके सुर में थोड़ा बदलाव जरूर आया था।
परंतु हाल ही में फिर से विधानसभा चुनाव में हुई हार मैं देवास भाजपा के पदाधिकारियों को दोषी बताते हुए जो दर्द उन्होंने वापस से मीडिया में छलकाया है। और वही भाजपा के दूसरे पदाधिकारियों का एक होकर एक सुर में कहना कि हमें तवज्जो नहीं दी जा रही कहीं ना कहीं भाजपा के लिए चुनाव में बहुत बड़ा संकट खड़ा करता दिख रहा है। अब इस समय में जब यह सीट भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। तब भाजपा संगठन के जिम्मेदार लोगों द्वारा ऐसे बयान बार-बार मीडिया के माध्यम से आना संगठन, कार्यकर्ता एवं मतदाताओं में उहापोह की स्थिति निर्मित कर रहा है। कहीं इन कथनों के द्वारा भाजपा को चुनाव में बड़ा खामियाजा भुगतना ना पड़े हालांकि प्रदेश संगठन बार-बार कह रहा है कि भाजपा में सब ठीक है सभी कार्यकर्ता मिलकर काम करेंगे एवं उपचुनाव में पार्टी को जीता कर लाएंगे परंतु मचे हुए इस घमासान में ऐसा तो कुछ होता दिख नहीं रहा है।
इन सब घटनाक्रम के बीच संघ के पूर्व कार्यकर्ता ने विधानसभा चुनाव में तैयारी शुरू कर दी है संघ के माध्यम से 30 वर्षों से सतत सक्रिय रहने वाले महेश पाटीदार मोर्चा खोल रखा है और साथ ही जनसंपर्क भी क्षेत्र में प्रारंभ कर दिया है हालांकि वे अपने जनसंपर्क में मतदाताओं भाजपा कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिलाते दिख रहे हैं कि पार्टी अपना फैसला बदल कर मुझे ही टिकट देगी मुझे ऊपर से संकेत मिले हैं जो भी हो उन्हें संकेत मिले हो या ना मिले हो अगर पार्टी अपना फैसला बदल कर टिकट उनको दे या ना भी दे तो क्या वे बागी चुनाव लड़ेंगे ऐसी स्थिति में एक यह संकट भी भाजपा पर मंडराता हुआ दिख रहा है पाटीदार संघ के पूर्व कार्यकर्ता है साथ ही पाटीदार समाज से ही आते हैं जो क्षेत्र में एक बड़े मतदाता समूह की भूमिका में है इस तरह से देखा जाए तो वर्तमान समय में उपचुनाव में भाजपा के लिए मैदान फतेह करना आसान रहा नहीं है सवाल यह है कि भाजपा हाटपिपल्या में क्या सब कुछ ठीक चल रहा है….?
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