चालाक पति ने कुटुंब न्यायालय से अपनी पत्नी से तलाक ले लिया और उसकी पत्नी को पता ही नहीं चला कि वह विवाहिता के तलाकशुदा हो गई।

रतलाम/इंडियामिक्स जवाहर नगर में रहने वाले नंदकिशोर मीणा निवासी 122 जवाहर नगर रतलाम की शादी 2018 में हिंदू रिती रिवाज के साथ सुनीता मीणा निवासी ग्राम इटावा तहसील पिपलोदा जिला कोटा राजस्थान से हुई थी विवाह के कुछ समय पश्चात ही पति और उसके परिवार वालों ने महिला से ₹50000 की मांग की जब महिला द्वारा इनकार किया गया तो पति ने महिला को घर से निकाल दिया तो महिला अपनी मां के पास अपने गांव में रहने लगी ।
इस दरमियान भी पति महिला से फोन पर बात करता रहता था तो महिला ने सोचा कि कुछ दिनों बाद यह अपने आप ही आकर उसे ले जाएंगे लेकिन उसके पति के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। पति ने रतलाम न्यायालय में 25 /8/20 को विवाह विच्छेद हेतु आवेदन प्रस्तुत किया जिस पर न्यायालय ने एक पक्षी कार्रवाई करते हुए दिनांक 15 /9/ 21 को निर्णय लिया और 17/9/ 21 को जय पत्र जारी कर तलाक का फैसला सुना दिया।

जिसकी कोई भी जानकारी पीड़िता को नहीं मिली और नहीं न्यायालय से कोई भी समन प्राप्त हुआ और ना किसी भी न्यायालय दस्तावेज पर महिला के हस्ताक्षर हुए।
महिला ने पति के विरुद्ध न्यायालय में 491 एवं 406 भादवी के अंतर्गत अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जिसके आधार पर पति उसके पिता उसकी माता बहन एवं अन्य के विरुद्ध अपराध क्रमांक 36 /2022 दिनांक 31/1/22 को दर्ज किया।
जब इटावा पुलिस ने प्रकरण की विवेचना के लिए उसके पति को बुलाया तो दिनांक 20/4/22 को पति ने बताया कि उसने कुटुंब न्यायालय रतलाम से विवाह विच्छेद का जय पत्र प्राप्त कर लिया है और उसका महिला से तलाक हो चुका है इसीलिए अब उसका उसे कोई भी लेना देना नहीं है।
यह बात पुलिस ने जब महिला को बताई तो महिला के होश उड़ गए उसने सही वस्तुस्थिति जानने के लिए रतलाम न्यायालय पहुंचकर न्यायलय से सभी दस्तावेजों की कॉपी निकलवा कर कल रतलाम में महिला थाना पहुंचकर पति के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची तथा न्यायालय में पूर्व फैसले जिसमें कि न्यायालय ने एक पक्षी कार्यवाही की थी और पूरे प्रकरण में उसका पक्ष अभी तक नहीं सुना गया है इसलिए उसने न्यायालय में अपील कि उसका पक्ष भी सुना जाए और पूर्व में जो न्यायालय ने फैसला दिया है उसका उसको निरस्त किया जाए तथा महिला को न्याय प्रदान किया जाए ताकि वह अपना जीवन सम्मान पूर्वक समाज में रहकर जी सके और उचित निर्णय कर उसके जीवन यापन हेतु खर्चा भी पति से दिलवाया जाए। महिला ने महिला ने बताया कि उसके पति ने अभी कुछ दिन पूर्व ही कोटा की एक अन्य महिला से शादी भी कर ली है। हो सकता है कि कुछ दिनों बाद उसके साथ भी उसका पति ऐसा करें अतः न्यायालय से निवेदन है कि मुझे मेरा हक दिलाए तथा जिस महिला से दूसरी शादी की है उसका भी भविष्य सुरक्षित हो ऐसी कार्यवाही करें।

महिला कल औद्योगिक महिला थाना पहुंची और पति के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने क्या है तो वहां उपस्थित महिला प्रभारी ने उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी तथा उसे यह प्रकरण न्यायालय में होने और न्यायालय के विरुद्ध वह कोई कार्यवाही नहीं कर सकते ऐसा कह कर टाल दिया गया और उसे न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराने को कहा गया। पीड़ित महिला ने मीडिया कर्मी को बताया कि अगर न्यायालय ने उसका पक्ष नहीं सुना और एक पक्षी फैसले को नहीं बदला तो उसे मजबूरन आत्महत्या करनी होगी जिसकी संपूर्ण जवाबदारी कुटुंब न्यायालय और माननीय न्यायधीश की होगी।
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