रतलाम के एडवोकेट प्रशांत ग्वालयरी की शिकायत पर दायर हुई जनहित याचिका, याचिका में दावा- असवैधानिक है ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री होना

रतलाम/इंडियामिक्स : पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार काफी चर्चा में रहा। इसके पीछे भाजपा व तृणमूल कांग्रेस की सीधी कांटेदार टक्कर रही। ममता बनर्जी के नन्दीग्राम से चुनाव हार जाने के बाद भी उनका मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना कई लोगो को समझ नहीं आया। सभी इस प्रश्न का उत्तर खोजने में लगे थे कि क्या ऐसा भी होता है ? मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद रतलाम के युवा एडवोकेट प्रशांत ग्वालियरी ने ई-मेल से शिकायत भेजी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर लिया है।
खास बात यह है की ममता की पार्टी की जीत के पीछे रणनीतिकार प्रशांत थे और अब ममता बनर्जी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले भी प्रशांत है। फर्क यह है कि वो प्रशांत “किशोर” थे और यह प्रशांत “ग्वालियरी” है। आपको बता दे कि एडवोकेट प्रशांत ग्वालियरी एक जानेमाने “समाजसेवी” वकील है जिन्होंने बहुत पहले रतलाम के एक वैश्विक स्तर के बड़े ज्वैलर्स कि भी धोखाधड़ी को सामने ला चुके हैं। वहिं खराब सड़को की मरम्मत किये बिना चुना लगा रही निजी टोल टैक्स कम्पनियों को भी श्री गवालयरी ने नियमो के उलंघन पर हाईकोर्ट में मामले को चलाया था। जिसमे हाईकोर्ट द्वारा टोल टैक्स वसूली को बंद करवा कर सड़को को सही करने का निर्देश दिया गया था।
दरअसल मामला यह है कि 5 मई 2021 को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, जबकि वह नंदीग्राम में विधानसभा का चुनाव हार चुकी थी । अपनी शिकायत में रतलाम के युवा एडवोकेट प्रशांत ग्वालियरी ने इस शपथ ग्रहण को असंवैधानिक बताते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट को ईमेल के माध्यम से दिनांक 16.06.21 को शिकायत प्रेषित की थी । माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा संबंधित शिकायत को जनहित याचिका (Public Interest Litigation PIL ) के रूप में नंबर No.61873/SCI/PIL/2021 पर दर्ज किया गया।
शिकायत में यह लिखा गया :-
अधिवक्ता प्रशांत ग्वालियरी द्वारा प्रेषित की गई शिकायत में बताया गया था कि ममता बनर्जी को आर्टिकल 164 (4) भारतीय संविधान के अंतर्गत शपथ दिलवाई गई है , जबकि 164 (4) में मंत्री की नियुक्ति संबंधी प्रावधान है न कि मुख्यमंत्री का। संपूर्ण प्रक्रिया को दूषित कर चुनाव हार जाने के बाद भी असंवैधानिक रूप से ममता बैनर्जी को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलवाई गई ।
श्री ग्वालियरी ने अपनी शिकायत में कहा कि एक और नागरिकों को नोटा के माध्यम से राइट टू रिजेक्ट संबंधी अधिकार की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है दूसरी ओर रिजेक्ट किए हुए प्रत्याशी को आर्टिकल 164 (4) का दुरुपयोग कर कर मुख्यमंत्री की शपथ दिलवाई जा रही है। यह सीधे तौर पर निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया का , लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाना है ।
नागरिकों द्वारा जिस प्रत्याशी को मतदान का प्रयोग कर हरा दिया गया है,आर्टिकल 164 (,4) का अनुचित प्रयोग कर कर उसे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलवाई जाना संविधान का ,लोकतंत्र का तथा जनता के निर्वाचन संबंधी अधिकार का अपमान है । यह वोट के अधिकार द्वारा चुनने की शक्ति को कमजोर करता है ।श्री ग्वालियरी ने अपनी शिकायत में आर्टिकल 164 (4) में यह संशोधन किए जाने की आवश्यकता बताई कि हारे हुए प्रत्याशी को मुख्यमंत्री या मंत्री पद की शपथ नहीं दिलवाई जाये ,इससे जनता के निर्वाचन संबंधी अधिकार , वोट के अधिकार को मजबूती मिलेगी ।
उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायलय से इस संबंध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन को शून्य घोषित किए जाने तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिए जाने की मांग की थी।
श्री ग्वालियरी को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से एस.एम.एस. द्वारा सुचना प्राप्त हुई कि उनकी शिकायत को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका के रूप दर्ज कर लिया गया है।
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