INDIAMIXINDIAMIXINDIAMIX
  • देश
  • मध्यप्रदेश
    • रतलाम
    • देवास
    • उज्जैन
    • सीहोर
    • इंदौर
    • भोपाल
    • झाबुआ
    • धार
    • सतना
    • रीवा
  • राज्य
    • गुजरात
      • दाहोद
    • उत्तरप्रदेश
      • लखनऊ
    • राजस्थान
      • जयपुर
      • उदयपुर
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
    • YouTube
    • Story Archives
    • टेक्नोलॉजी
    • विडियो
    • सेहत/घरेलु नुस्खे
    • धर्म/ज्योतिष
    • कला/साहित्य
    • खेल
Search
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-8959521010
Reading: राजनीति : केंद्र की राजनीति में नीतीश, बिहार में भाजपा युग
Share
Notification
Font ResizerAa
INDIAMIXINDIAMIX
Font ResizerAa
  • देश
  • मध्यप्रदेश
  • राज्य
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
Search
  • देश
  • मध्यप्रदेश
    • रतलाम
    • देवास
    • उज्जैन
    • सीहोर
    • इंदौर
    • भोपाल
    • झाबुआ
    • धार
    • सतना
    • रीवा
  • राज्य
    • गुजरात
    • उत्तरप्रदेश
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • दुनिया
  • अन्य
    • YouTube
    • Story Archives
    • टेक्नोलॉजी
    • विडियो
    • सेहत/घरेलु नुस्खे
    • धर्म/ज्योतिष
    • कला/साहित्य
    • खेल
Follow US
  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-9753910111
INDIAMIX > राजनीति > राजनीति : केंद्र की राजनीति में नीतीश, बिहार में भाजपा युग
राजनीति

राजनीति : केंद्र की राजनीति में नीतीश, बिहार में भाजपा युग

Ajai Kumar
Last updated: 10/04/2026 5:53 PM
By
Ajai Kumar
Share
9 Min Read
SHARE
Nitish in central politics, BJP era in Bihar

 न्यूज़ डेस्क/इंडियामिक्स करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार का राज्यसभा की राह पकड़ना केवल एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस लंबे दौर का मोड़ है जिसने 2005 के बाद बिहार की राजनीति की दिशा तय की। जिस नेता ने करीब 21 वर्षों तक राज्य की सत्ता को प्रभावित किया, वही अब दिल्ली की राजनीति में नई भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि बिहार की राजनीति लंबे समय से एक ही नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है और अब पहली बार इतने लंबे कार्यकाल के बाद सत्ता में बड़ा संक्रमण दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री कार्यकाल बिहार के इतिहास में सबसे लंबे और प्रभावशाली कार्यकालों में गिना जाता है। नवंबर 2005 में स्थायी सरकार बनने के बाद से अप्रैल 2026 तक, अलग-अलग चरणों को जोड़कर उन्होंने लगभग 18 से 19 वर्षों तक मुख्यमंत्री पद संभाला। इस दौरान वे कुल 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जाता है। 2000 में पहली बार वे सात दिन के लिए मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद 24 नवंबर 2005 को दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार में स्थिर सरकार का दौर शुरू हुआ।

-- विज्ञापन --

राजनीतिक सफर के शुरुआती चरण पर नजर डालें तो 1985 में पहली बार विधायक बनने के साथ उनकी सक्रिय राजनीति शुरू हुई। उसके चार साल बाद, यानी 1989 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे। 1989 से 2004 तक लगातार चार बार लोकसभा सदस्य चुने जाने का रिकॉर्ड उनके नाम रहा। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां निभाईं। 1990 के दशक में कृषि राज्य मंत्री के रूप में काम करने के बाद 1998 से 2004 के बीच रेल मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे अहम मंत्रालय संभाले। रेल मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में कई नई रेल परियोजनाएं शुरू हुईं और यात्री सुविधाओं में सुधार के प्रयास किए गए, जिससे उन्हें प्रशासनिक अनुभव मिला। 2005 में जब उन्होंने बिहार की सत्ता संभाली, तब राज्य की स्थिति कई मायनों में चुनौतीपूर्ण थी। उस समय राज्य की सड़क व्यवस्था कमजोर मानी जाती थी और ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्गों की कमी थी। 2005 के बाद के वर्षों में हजारों किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया गया। आंकड़ों के अनुसार, 2005 से 2020 के बीच राज्य में लाखों किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य हुआ, जिससे गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ने की प्रक्रिया तेज हुई।

-- विज्ञापन --

शिक्षा क्षेत्र में भी उनके कार्यकाल को बदलाव के दौर के रूप में देखा गया। 2006 में शुरू की गई साइकिल योजना का प्रभाव सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इस योजना के तहत अब तक एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराई गई, जिससे खासकर लड़कियों की स्कूल पहुंच बढ़ी। 2005 में जहां माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन प्रतिशत अपेक्षाकृत कम था, वहीं अगले दस वर्षों में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह पोशाक योजना और छात्रवृत्ति योजनाओं ने भी स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाने में भूमिका निभाई।पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला उनके शासनकाल की सबसे बड़ी प्रशासनिक पहलों में गिना जाता है। बिहार देश के उन शुरुआती राज्यों में शामिल हुआ, जहां पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी इतनी बड़ी संख्या में बढ़ी। इसके बाद हजारों महिलाएं मुखिया, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्य के रूप में सामने आईं। इस फैसले ने ग्रामीण राजनीति का स्वरूप बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

-- विज्ञापन --

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई बदलाव दर्ज किए गए। 2005 के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई और जिला अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार की प्रक्रिया शुरू हुई। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिसे स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुंच का संकेत माना गया।हालांकि उनकी राजनीति केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं रही। गठबंधन की राजनीति में बार-बार बदलाव उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान बन गई। वर्ष 2013 में उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होकर नई राजनीतिक दिशा अपनाई। 2017 में फिर उसी गठबंधन में वापसी की। 2022 में उन्होंने एक बार फिर दिशा बदली और 2024 में पुनः उसी गठबंधन में शामिल हो गए। लगभग 11 वर्षों के भीतर चार बड़े राजनीतिक बदलाव उनके राजनीतिक जीवन की जटिलता को दर्शाते हैं।2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को भी उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ माना जा रहा है। राज्य की 243 सीटों वाली विधानसभा में गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला और इसके बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन चुनाव के चार-पांच महीने के भीतर ही राज्यसभा की ओर बढ़ने का फैसला यह संकेत देता है कि यह केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

राज्यसभा में जाने के साथ ही एक और अहम रिकॉर्ड उनके नाम जुड़ गया है। वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के चारों सदनों विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा की सदस्यता का अनुभव हासिल किया है। भारतीय राजनीति में ऐसे नेताओं की संख्या बहुत कम मानी जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली में उनकी भूमिका क्या होगी। लंबे प्रशासनिक अनुभव के आधार पर यह माना जा रहा है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण या गठबंधन प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पिछले 30 से अधिक वर्षों के संसदीय अनुभव और लगभग दो दशकों के मुख्यमंत्री कार्यकाल ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है, जो जटिल राजनीतिक समीकरणों को समझने और संतुलित करने में सक्षम माने जाते हैं।दूसरी ओर, बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया ने नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। राज्य में करीब 13 करोड़ की आबादी और 38 जिलों वाले इस बड़े राज्य का नेतृत्व संभालना आसान नहीं माना जाता। नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि पिछले वर्षों में शुरू की गई योजनाओं को जारी रखा जाए और साथ ही नई प्राथमिकताओं को भी लागू किया जाए।

बिहार की राजनीति इस समय एक संक्रमण काल से गुजर रही है। पिछले लगभग 20 वर्षों में जो प्रशासनिक ढांचा तैयार हुआ, उसे बनाए रखना और आगे बढ़ाना नई सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या नई सरकार विकास की उसी गति को बनाए रख पाती है, जो पिछले वर्षों में देखने को मिली थी। नीतीश कुमार का दिल्ली की ओर बढ़ना उनके राजनीतिक जीवन का एक पूर्ण चक्र भी माना जा रहा है। जिस नेता ने सांसद के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी, वही अब मुख्यमंत्री पद से हटकर फिर संसद की ओर लौट रहा है। यह बदलाव केवल पद का परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार और राष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए एक नए दौर की शुरुआत का संकेत है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह फैसला केवल जिम्मेदारी बदलने तक सीमित था या फिर राष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़े राजनीतिक किरदार की भूमिका तय करने की तैयारी।


Website Design By

KAMAKSHI WEB

CONTACT : +91-9753910111


 

डिस्क्लेमर

 खबर से सम्बंधित समस्त जानकारी और साक्ष्य ऑथर/पत्रकार/संवाददाता की जिम्मेदारी हैं. खबर से इंडियामिक्स मीडिया नेटवर्क सहमत हो ये जरुरी नही है. आपत्ति या सुझाव के लिए ईमेल करे : editor@indiamix.in

इंडियामिक्स को सब्सक्राइब करे

Get it on Indus Appstore
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Threads
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Cry0
Surprise0
Angry0
Embarrass0
ByAjai Kumar
Follow:
वरिष्ठ पत्रकार , इंडियामिक्स, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Previous Article अमेरिका-ईरान सीजफायर: पाक की कूटनीतिक जीत, 'विश्वगुरु देखता रह गया अमेरिका-ईरान सीजफायर: पाक की कूटनीतिक जीत, ‘विश्वगुरु देखता रह गया
Next Article पश्चिम बंगाल में बीजेपी का छह माह में यूसीसी, महिलाओं को तीन हजार महीना वाला मास्टरस्ट्रोक पश्चिम बंगाल में बीजेपी का छह माह में यूसीसी, महिलाओं को तीन हजार महीना वाला मास्टरस्ट्रोक
Leave a review Leave a review

Leave a Review Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please select a rating!

प्रशासनिक अधिकारियो से, नेताओ से और पुलिस से आपका निजी लगाव आपकी पत्रकारिता को निष्पक्ष नहीं रहने देता

मुकेश धभाई, संपादक, इंडियामिक्स

Stay Connected

FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
WhatsAppFollow
Google NewsFollow
ThreadsFollow
RSS FeedFollow

Latest News

पश्चिम बंगाल में बीजेपी का छह माह में यूसीसी, महिलाओं को तीन हजार महीना वाला मास्टरस्ट्रोक
पश्चिम बंगाल में बीजेपी का छह माह में यूसीसी, महिलाओं को तीन हजार महीना वाला मास्टरस्ट्रोक
राजनीति राज्य
10/04/2026
अमेरिका-ईरान सीजफायर: पाक की कूटनीतिक जीत, 'विश्वगुरु देखता रह गया
अमेरिका-ईरान सीजफायर: पाक की कूटनीतिक जीत, ‘विश्वगुरु देखता रह गया
दुनिया
08/04/2026
पवन खेड़ा के घर पहुंची असम पुलिस को नहीं मिले नेताजी
पवन खेड़ा के घर पहुंची असम पुलिस को नहीं मिले नेताजी
राजनीति राज्य
07/04/2026
राजनीति: पश्चिम बंगाल की नई वोटर लिस्ट से 91 लाख बाहर
राजनीति: पश्चिम बंगाल की नई वोटर लिस्ट से 91 लाख बाहर
देश राजनीति
07/04/2026
बीजेपी के स्थापना दिवस पर दिल्ली से लखनऊ तक भगवामय
बीजेपी के स्थापना दिवस पर दिल्ली से लखनऊ तक भगवामय
देश राजनीति
06/04/2026

पत्रकारिता आपकी जान ले सकती हैं, लेकिन जब तक आप इसमें हैं, तब तक ये आपको जीवित रखेगी.

होरेस ग्रीले
//

IndiaMIX Media Network was established in November 2018 in Ratlam city of Madhya Pradesh. Keeping in view the current digital era, it was started as a digital media (news portal).

  • About Us
  • Cookie Policy
  • Support Us
  • Fact Checking Policy
  • Ethics Policy
  • Term of Use
  • Corrections Policy
  • Privacy Policy
  • Contact Us
INDIAMIXINDIAMIX
Follow US
© 2018-2025 IndiaMIX Media Network., All Rights Reserved. Designed by Kamakshi Web +91-8959521010