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Reading: अपर्णा यादव ने जलाया सपा का झंडा, समाजवादियों ने किया पुलिस केस
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INDIAMIX > राज्य > उत्तरप्रदेश > लखनऊ > अपर्णा यादव ने जलाया सपा का झंडा, समाजवादियों ने किया पुलिस केस
उत्तरप्रदेशलखनऊ

अपर्णा यादव ने जलाया सपा का झंडा, समाजवादियों ने किया पुलिस केस

SANJAY SAXENA
Last updated: 21/04/2026 7:26 AM
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SANJAY SAXENA
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8 Min Read
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Aparna Yadav burns SP flag; Socialists file police complaint.

न्यूज़ डेस्क/इंडियामिक्स उत्तर प्रदेश विधानसभा के सामने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के झंडे जलाने वाली घटना ने मुलायम सिंह यादव के परिवार में छिपी रस्साकशी को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव ने महिला आरक्षण बिल के संसद में पारित न होने पर यह कड़ा कदम उठाया। इस कृत्य से सपा के नेता भड़क उठे हैं और हजरतगंज कोतवाली में अपर्णा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तहरीर दे दी गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे इमोशन हर्ट करने वाला बताते हुए नरमी बरती, लेकिन परिवार के इस खुल्लमखुल्ला टकराव ने मुलायम खानदान की राजनीतिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपर्णा का यह बागी तेवर नया नहीं है; वे पहले भी कई बार सपा के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल चुकी हैं, जो परिवार की आंतरिक जंग को और गहरा बनाता जा रहा है।

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महिला आरक्षण बिल का संसद में अटकना विपक्षी दलों के लिए राजनीतिक मुद्दा बन गया था। अपर्णा यादव, जो भाजपा की टिकट पर 2022 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ के पुष्पांजलि विधान क्षेत्र से जीतीं, ने इसे महिलाओं के अपमान के रूप में देखा। विधानसभा भवन के सामने धरना देते हुए उन्होंने सपा और कांग्रेस के झंडे जलाए, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। अपर्णा ने कहा, महिलाओं के हक के लिए यह जरूरी था। सपा और कांग्रेस ने बिल पास नहीं होने दिया, इसलिए उनका विरोध जायज है। यह घटना लखनऊ की सियासी गलियों में आग की तरह फैल गई। सपा नेताओं ने इसे पार्टी के सम्मान पर हमला करार दिया। पूर्व विधायक मनोज कुमार ने तहरीर देते हुए कहा, यह अराजकता है। अपर्णा को पद से हटाया जाए और कानूनी कार्रवाई हो।

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अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया दिलचस्प रही। उन्होंने कहा, किसी के इमोशन को हर्ट नहीं करना चाहिए। यह बयान अपर्णा के प्रति अप्रत्यक्ष निंदा तो था, लेकिन परिवार की एकता बचाने की कोशिश भी नजर आई। अखिलेश, जो मुलायम के बड़े बेटे और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लंबे समय से परिवार में प्रभुत्व बनाए हुए हैं। अपर्णा का भाजपा से जुड़ाव और अब खुला विरोध उन्हें चुनौती दे रहा है। मुलायम सिंह यादव का निधन 2022 में होने के बाद परिवार दो धड़ों में बंट चुका था। अखिलेश गुट और प्रतीक-अपर्णा गुट। अपर्णा ने 2024 लोकसभा चुनाव में सपा के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी का समर्थन किया था, जो पारिवारिक कलह का प्रतीक था। अब झंडा जलाने की घटना ने इस रस्साकशी को चरम पर पहुंचा दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपर्णा का यह कदम भाजपा हाईकमान को संदेश है कि वे सपा के खिलाफ मुखर रहेंगी, जिससे उत्तर प्रदेश की सियासत में नया मोड़ आ सकता है।

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अपर्णा का सपा विरोध कोई आज की बात नहीं है। 2022 विधानसभा चुनाव से पहले ही उन्होंने सपा छोड़ दी थी। मुलायम के निधन के बाद परिवार में संपत्ति और राजनीतिक विरासत के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ। अपर्णा ने सपा को महिला विरोधी बताते हुए भाजपा जॉइन की। चुनाव में उन्होंने अखिलेश के करीबी को हराया, जो सपा के लिए बड़ा झटका था। उसके बाद 2023 में सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से प्रतीक यादव को हटाए जाने पर अपर्णा ने खुलकर अखिलेश की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था, सपा में भाईचारे का नामोनिशान नहीं बचा। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान अपर्णा ने लखनऊ में सपा प्रत्याशी रवि प्रकाश को निशाना बनाया और भाजपा की राजा भैया का प्रचार किया। एक रैली में उन्होंने सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाया, जो अखिलेश के लिए व्यक्तिगत आघात था।

फिर 2025 में उत्तर प्रदेश नगर निगम चुनावों के समय अपर्णा ने सपा के खिलाफ मोर्चा खोला। लखनऊ महानगर में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सपा उम्मीदवारों पर हमला बोला। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, सपा महिलाओं की दुश्मन है, आरक्षण बिल पर उनकी चुप्पी इसका प्रमाण है। इस दौरान प्रतीक यादव ने भी अपर्णा का साथ दिया, जिससे सपा में हड़कंप मच गया। अपर्णा ने सपा के मुस्लिम तुष्टीकरण पर भी सवाल उठाए, जो पार्टी की कोर स्ट्रैटेजी को चुनौती था। इन घटनाओं ने मुलायम परिवार को दो हिस्सों में बांट दिया। अखिलेश का सैफई गुट बनाम अपर्णा का लखनऊ गुट। प्रतीक यादव, जो कभी सपा सांसद रह चुके हैं, अब भाजपा के करीब दिखते हैं। परिवार के बुजुर्ग नेता शिवपाल सिंह यादव ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

यह आंतरिक कलह सपा की राजनीतिक ताकत को कमजोर कर रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने 37 सीटें जीतीं, लेकिन अपर्णा जैसे बागियों ने भाजपा को फायदा पहुंचाया। विश्लेषक कहते हैं कि अपर्णा का झंडा जलाना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सपा के वोट बैंक को भेदने की रणनीति है। भाजपा ने अपर्णा को राज्य महिला आयोग का पद देकर उनका इस्तेमाल किया है। महिला मुद्दों पर उनकी मुखरता भाजपा की नारी शक्ति इमेज को मजबूत करती है। दूसरी ओर, अखिलेश सपा को एकजुट रखने के लिए पारिवारिक कार्ड खेल रहे हैं। उनका इमोशन हर्ट बयान इसी का हिस्सा था। लेकिन अपर्णा पीछे हटने को तैयार नहीं। उन्होंने कहा, मैं मुलायम जी की बहू हूं, सच्चाई बोलूंगी। मुलायम परिवार की यह रस्साकशी उत्तर प्रदेश की सियासत को प्रभावित करेगी। 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, जहां सपा-भाजपा की सीधी टक्कर होगी। अपर्णा अगर लखनऊ में फिर सक्रिय हुईं, तो सपा को नुकसान हो सकता है। प्रतीक यादव की चुप्पी भी चिंता का विषय है। क्या वे खुलकर भाजपा में शामिल होंगे? परिवार के अन्य सदस्य जैसे अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव ने चुप्पी साधी है, लेकिन आंतरिक असंतोष साफ दिखता है। सपा नेता पंकज सिंह ने कहा, अपर्णा का यह तमाशा परिवार को बर्बाद करेगा। वहीं, भाजपा ने इसे महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।

इस घटना ने मुलायम की विरासत पर सवाल उठाए हैं। मुलायम ने कभी परिवार को एकजुट रखा, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में भाईचारा टूट गया। अपर्णा का सपा विरोध न केवल राजनीतिक, बल्कि व्यक्तिगत भी है। वे कहती हैं, मैं सपा से कभी नहीं लड़ी, अखिलेश की तानाशाही से लड़ी। अखिलेश गुट इसे गद्दारी मानता है। पुलिस ने तहरीर पर जांच शुरू कर दी है, लेकिन अपर्णा को गिरफ्तारी की संभावना कम है। यह विवाद सपा को कमजोर कर भाजपा को मजबूत करेगा। उत्तर प्रदेश में यादव वोट बैंक का बंटवारा तय है। अपर्णा की बगावत मुलायम परिवार की कहानी को नया अध्याय दे रही है।


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