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देश : राजनीति और पूंजीवादी के गठबंधन पर देश का भविष्य टिका रह सकता है ?

फोर्ब्स की सूची आ गई है, जिसमे अम्बानी लगातार 13वें साल भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बने हैं..

सम्पादकीय / इंडियामिक्स न्यूज़ जिसमे 6 साल तो मोदी जी की सरकार रही है, बाकी 7 साल कांग्रेस की रही है..जो यह बताते हैं कि मोदी सरकार अम्बानी की सरकार है.. मोदी ने अम्बानी के हाथों देश बेच दिया गया है.. आदि आदि..

खैर मुझे सरकारों पर नहीं जाना.. यह देश का पुराना राग रहा है.. कभी विपक्ष के लिए टाटा बिरला आदि भी मुद्दे थे.. आज अम्बानी है.. कल भी अम्बानी आज वाली सरकार के लिए मुद्दे थे और मेरा स्प्ष्ट मानना है.. ये सभी उद्योगपति बिना किसी सरकारी सरंक्षण के फल फूल ही नहीं सकते है..

यहां मुद्दा ये है कि जब उनकी सरकार थी तो उन्होंने अम्बानी को सरंक्षण दिया और कई ऐसे समझौते किये जो सही नहीं थे.. फिर भी किया और आगे बढ़ने का मौका दिया.. फिर आज वही ये क्यों कहते हैं कि अरे इन्होंने तो देश को अम्बानी के हाथों बेच दिया.. कई लोगो को ये भी लगेगा ये डबल स्टैंडर्ड है.. जो सही भी है..

लेकिन मुद्दा केवल इतना नहीं है.. और न ही ये सीधे तौर पर मौजूदा सरकार पर हमला है.. यह विशुद्ध ब्लैकमेलिंग का मुद्दा है.. जिसमे खुद उद्योगपति विपक्ष के निशाने पर है.. कि अरे तुमको तो हमने आगे बढ़ाया.. तुम्हारे लिए कई संवैधानिक या गैरसंवैधानिक समझौते किये.. और तुम कैसे सरकार बदलने पर पलटी खा गए??

वे गाहे बगाहे उद्योगपति को यह भी याद दिलाते हैं कि देखो हमारी सरकार आएगी तो हम तुमसे निपट लेंगे.. बस अम्बानी वाला मुद्दा खाली इतना ही है और शायद उनकी ओर से इन्हें चंदा भी न मिल रहा हो.. बाकी सरकार बनने पर कब कौन पलटी खा जाए.. कब इनका अम्बानी से फिर कनेक्शन बढ़ जाये..

यह भविष्य के गर्भ में है और हद तक निश्चित भी है.. दोनों को या कहें सबको अपने अपने फायदे देखने हैं और उसी आधार पर समय समय नैरेटिव गढ़ते हैं..

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