लन्दन : चीन का जैविक हथियार है कोरोना !, दस्तावेजो में चौकाने वाला खुलासा

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मीडिया रिपोर्ट्स में दावा, पाँच साल पहले ही चीन के वैज्ञानिकों ने की थी “कोरोना वायरस” को हथियार के तौर पर इस्तेमाल की जाँच, तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियार से होगा ऐसा लगाया था पूर्वानुमान, दूसरे देशों के चिकित्सा तंत्र को नष्ट करना था उद्देश्य

लन्दन : चीन का जैविक हथियार है कोरोना !, दस्तावेजो में चौकाने वाला खुलासा

लंदन/ इंडियामिक्स : इस समय पूरा विश्व चीन से पनपी कोरोना नामक भयँकर महामारी से जूझ रहा है ऐसे में समय रहते चीनियों पर से सभी की नाराज़गी लगभग खत्म भी हो चुकी थी मगर अमरीकी विदेश विभाग के हाथ लगे दस्तावेजो ने फिर से चीन को कटघरे में ला दिया है। उक्त दस्तावेजों में यह उल्लेखित है की चीन “जैविक विश्व युद्ध” की तैय्यारी कर रहा था।

दरअसल बात यह है की, चीन के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 महामारी से पांच साल पहले कथित तौर पर कोरोना वायरस को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में जांच की थी और उन्होंने तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियार से लड़ने का पूर्वानुमान लगाया था। अमेरिकी विदेश विभाग को प्राप्त हुए दस्तावेजों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है।

अमेरिका के हाथ लगे “भयानक” दस्तावेज :-

ब्रिटेन के ‘द सन’ अखबार ने ‘द ऑस्ट्रेलियन’ की तरफ से सबसे पहले जारी रिपोर्ट के हवाले से कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग के हाथ लगे यह ”भयानक” दस्तावेज कथित तौर पर दर्शाते हैं कि चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (P.L.A.) के कमांडर यह घातक पूर्वानुमान जता रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों को मिले दस्तावेज कथित तौर पर वर्ष 2015 में उन सैन्य वैज्ञानिकों और वरिष्ठ चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा लिखे गए थे जो की कोविड-19 की उत्पत्ति के संबंध में जांच कर रहे थे।

कोरोना वायरस, ”जैविक हथियार का नया युग” :-

चीनी वैज्ञानिकों ने सार्स कोरोना वायरस का ”जैविक हथियार के नए युग” के तौर पर उल्लेख किया था, कोविड जिसका एक उदाहरण है। P.L.A. के दस्तावेजों में दर्शाया गया की जैव हथियार हमले से दुश्मन के चिकित्सा तंत्र को नष्ट किया जा सकता है। दस्तावेजों में अमेरिकी वायुसेना के कर्नल माइकल जे के कार्यों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने इस बात की आशंका जताई थी की तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियारों से लड़ा जा सकता है।

चीन की पारदर्शिता को लेकर चिंता :-

दस्तावेजों में इस बात का भी उल्लेख है की चीन में वर्ष 2003 में फैला सार्स एक मानव-निर्मित जैव हथियार हो सकता है, जिसे आंतकियों ने जानबूझकर फैलाया हो। सांसद टॉम टगेनधट और आस्ट्रेलियाई राजनेता जेम्स पेटरसन ने कहा कि इन दस्तावेजों ने कोविड-19 की उत्पत्ति के बारे में चीन की पारदर्शिता को लेकर चिंता पैदा कर दी है। हालांकि, बीजिंग में सरकारी ग्लोबल टाइम्स समाचार पत्र ने चीन की छवि खराब करने के लिए इस लेख को प्रकाशित करने को लेकर दी आस्ट्रेलियन की आलोचना की है।

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