राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा स्व-सहायता समूह की महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर

सीहोर / इंडियामिक्स न्यूज़ तुलसी आयुर्वेदिक पद्धति में उपयोग किया जाने वाला महत्वपूर्ण पौधा है। इसकी जड़ एवं पत्तियों का उपयोग रोग व्याधि क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है इसी के अनुक्रम में विकासखंड इछावर में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा स्व-सहायता समूह की दीदियों को सोयाबीन के साथ-साथ आईटीसी के अभिसरण से औषधीय पौधों की खेती के अंतर्गत पूजा तुलसी, अश्वगंधा आदि की फसल का एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण प्राप्त कर ग्राम बिछौली, शाहपुरा, जमुनिया फतेहपुर, सिराड़ी एवं मोगरा की लगभग 8 से 10 महिला कृषकों द्वारा सफलतापूर्वक तुलसी की खेती की जा रही है लगभग 60 से 70 दिन पश्चात आज यह पौधे 3 से 4 फीट के हो चुके हैं वर्तमान समय में प्रकृति के प्रकोप एवं बारिश की मार से सोयाबीन का उत्पाद भले ही बहुत कम हुआ है परंतु तुलसी की फसल लहलहा रही हैं। तुलसी की खेती से इन महिला कृषकों को ना केवल आर्थिक लाभ होता है, वरन मृदा के सूक्ष्म कणों को भी लाभ पहुंचता है इन्हीं में से एक है।

ग्राम सिराडी की अनीता दीदी इनके द्वारा 1 एकड़ भूमि में लगभग 9000 की लागत से तुलसी की खेती की गई जिसमें 300 प्रति एकड़ बीज एवं शेष गोबर खाद, निंदाई, गुड़ाई, सिंचाई आदि पर व्यय हुआ है। 1 एकड़ पर खेती से 10 से 12 क्विंटल तुलसी प्राप्त हुई जिसका विक्रय लगभग 35 हजार से 38 हजार तक होता है। आईटीसी के माध्यम से इन औषधीय पौधों को बाय बैक किया जाकर औषधीय निर्माण हेतु संस्था द्वारा खरीद लिया जाता है। इस प्रकार अनीता दीदी द्वारा तुलसी की खेती कर ना केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी वरन खेत एवं आसपास के वातावरण को भी शुद्ध किया जा रहा है।
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