भारत ने सफतलापूर्वक लांच किया अपना तीसरा चन्द्र मिशन ‘चंद्रयान 3’

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इसरो ने अपने विश्व प्रसिद्ध फैट रोकेट द्वारा श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र के दूसरे ‘लॉन्च पैड’ से दोपहर 2.35 बजे निर्धारित समय पर चंद्रयान 3 को सफलतापूर्वक लांच किया

भारत ने सफतलापूर्वक लांच किया अपना तीसरा चन्द्र मिशन 'चंद्रयान 3'
Sriharikota: ISRO’s Launch Vehicle Mark-III (LVM3) M4 rocket carrying ‘Chandrayaan-3’ lifts off from the launch pad at Satish Dhawan Space Centre, in Sriharikota, Friday, July 14, 2023.

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश),(एजेंसी): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को यहां से एलवीएम3-एम4 रॉकेट द्वारा अपने तीसरे चंद्र मिशन-‘चंद्रयान-3’ को सफलतापूर्वक अन्तरिक्ष में लांच किया। कल से शुरू हुई 25.30 घंटे की उलटी गिनती के बाद आज एलवीएम3-एम4 रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र के दूसरे ‘लॉन्च पैड’ से अपराह्न 2.35 बजे निर्धारित समय पर धुएं का घना गुबार छोड़ते हुए चंद्रयान शानदार ढंग से आकाश की ओर रवाना हुआ।

प्रक्षेपण के सोलह मिनट बाद प्रक्षेपण माड्यूल रॉकेट से अलग हो जाएगा। एलवीएम3-एम4 रॉकेट अपनी श्रेणी में सबसे बड़ा और भारी रोकेट है जिसे वैज्ञानिक ‘फैट बॉय’ कहते हैं। उस समय इसे लांच होते देख रहे हजारों दर्शक खुशी से झूम उठे। आज रवाना हुआ ‘चंद्र मिशन’ 2019 के ‘चंद्रयान-2’ का अनुवर्ती मिशन है। भारत के इस तीसरे चंद्र मिशन में भी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का है।

‘चंद्रयान-2’ मिशन के दौरान अंतिम क्षणों में लैंडर ‘विक्रम’ पथ विचलन के कारण ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने में सफल नहीं हुआ था। यदि इस बार इस मिशन में सफलता मिलती है तो भारत ऐसी उपलब्धि हासिल कर चुके अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ जैसे देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा।

इसरो ने पहले कहा था कि ‘चंद्रयान-3’ कार्यक्रम के अंतर्गत इसरो अपने चंद्र मॉड्यूल की मदद से चंद्र सतह पर ‘सॉफ्ट-लैंडिंग’ और चंद्र भूभाग पर रोवर के घूमने का प्रदर्शन करके नई सीमाएं पार करने जा रहा है। एलवीएम3एम4 रॉकेट को पहले जीएसएलवीएमके3 कहा जाता था। अगस्त के अंत में ‘चंद्रयान-3’ की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की योजना बनाई गई है। उम्मीद है कि यह मिशन भविष्य के अंतरग्रही अभियानों के लिए सहायक होगा।

चंद्रयान-3 मिशन में एक स्वदेशी प्रणोदन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और एक रोवर शामिल है जिसका उद्देश्य अंतर-ग्रहीय अभियानों के लिए आवश्यक नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करना और प्रदर्शित करना है। शुक्रवार का मिशन एलवीएम3 की चौथी अभियानगत उड़ान है जिसका उद्देश्य ‘चंद्रयान-3’ को भू-समकालिक कक्षा में प्रक्षेपित करना है।

इसरो ने कहा कि एलवीएम3 रॉकेट ने कई उपग्रहों को प्रक्षेपित करने, अंतरग्रही अभियानों सहित अधिकतर जटिल अभियानों को पूरा करने करने की अपनी विशिष्टता साबित की है। इसने कहा कि यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहक उपग्रहों को ले जाने वाला सबसे बड़ा और भारी प्रक्षेपण यान भी है।

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